Wednesday, 3 June 2020

वैज्ञानिकों का अनुमान : भारत में कोरोना वायरस ने नवंबर-दिसंबर में ही दे दी थी दस्तक : संजय पाटिल

वैज्ञानिकों का अनुमान : भारत में कोरोना वायरस ने नवंबर-दिसंबर में ही दे दी थी दस्तक : संजय पाटिल

NBT

संजय पाटिल : नागपुर प्रेस मीडिया  : 4 जून 2020 : हैदराबाद : भारत में कोविड-19 का पहला केस (first coronavirus case in India) वैसे तो 30 जनवरी को केरल में मिला था। लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का दावा है कि भारत में कोरोना वायरस नवंबर 2019 से ही फैल रहा था। वैज्ञानिक भाषा में कहा जाए तो कोरोना वायरस के इंडियन स्ट्रेन का MRCA (मोस्ट रिसेंट कॉमन एन्सेस्टर) नवंबर 2019 से ही फैल रहा था।

26 नवंबर से 25 दिसंबर के बीच भारत में आया कोरोना!



देश के शीर्ष रिसर्च इंस्टिट्यूट के टॉप वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वुहान के नोवेल कोरोना वायरस स्ट्रेन के ठीक पहले वाले रूप का 11 दिसंबर 2019 तक प्रसार हो रहा था। टाइम टु मोस्ट रिसेंट कॉमन एन्सेस्टर (MRCA) नाम की वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि अभी तेलंगाना और दूसरे राज्यों में कोरोना वायरस का जो स्ट्रेन फैल रहा है वह 26 नवंबर और 25 दिसंबर के बीच में पैदा हुआ था। इसकी औसत तारीख 11 दिसंबर है।


.तो टेस्ट के अभाव में पता नहीं लग सका



सवाल उठता है कि क्या भारत में 30 जनवरी से पहले ही चीन से आने वाले यात्रियों के जरिए कोरोना वायरस ने दस्तक दी थी। इसका जवाब साफ नहीं है क्योंकि उस वक्त देश में बड़े पैमाने पर कोविड-19 के टेस्ट नहीं हो रहे थे।



वैज्ञानिकों ने भारत में कोरोना का एक नया स्ट्रेन खोजा




हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेलुलर ऐंड मॉलिक्यूलर बायॉलजी (CCMB) ने न सिर्फ कोरोना वायरस के भारतीय स्ट्रेन के MRCA की टाइमिंग का अनुमान लगाया है बल्कि एक नए स्ट्रेन या क्लेड की भी खोज की है जो मौजूदा स्ट्रेन से अलग है। वैज्ञानिकों ने भारत के कोरोना के नए स्ट्रेन को क्लेड I/A3i नाम दिया है।


नए स्ट्रेन की जड़ें चीन नहीं बल्कि किसी दक्षिण-पूर्व एशियाई देश से जुड़ी



केरल में मिले भारत के पहले कोरोना केस का स्ट्रेन वुहान से जुड़ा हुआ था लेकिन हैदराबाद में कोरोना के जिस नए स्ट्रेन की खोज हुई है उसकी जड़े चीन में नहीं बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के किसी देश की है। CCMB के डायरेक्टर डॉक्टर राकेश के. मिश्रा ने बताया कि नया स्ट्रेन किस देश से पैदा हुआ यह पता नहीं चला है लेकिन यह चीन का नहीं है, किसी दक्षिण-पूर्व एशियाई देश का है।


नया स्ट्रेन तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और दिल्ली में बड़े पैमाने पर फैल रहा



वैज्ञानिकों ने भारत में कोरोना वायरस के जिस नए स्ट्रेन को खोजा है वह तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र और दिल्ली में बड़े पैमाने पर फैल रहा है। बिहार, कर्नाटक, यूपी, पश्चिम बंगाल, गुजरात और मध्य प्रदेश में भी नया स्ट्रेन फैल रहा है।
डॉ. नितीन राऊत "प्रस्तावित वीज विधेयकाला विरोध" "विजेला सार्वजनिक क्षेत्राच्याच ताब्यात ठेवणे गरजेचे" : संजय पाटील

डॉ. नितीन राऊत "प्रस्तावित वीज विधेयकाला विरोध" "विजेला सार्वजनिक क्षेत्राच्याच ताब्यात ठेवणे गरजेचे" : संजय पाटील

Independence Day Speech By Dr. Nitin Raut Guardian Minister ...

संजय पाटील : नागपूर प्रेस मीडिया : 4 जून 2020 : नागपूर : केंद्र सरकारने 'विद्युत कायदा २००३' मध्ये सुधारणा करण्याचा निर्णय घेतला. मात्र, 'वीज सुधारणा विधेयक २०२०'ला विविध राज्यांसह वीज कंपन्यांमध्ये काम करणाऱ्या कर्मचाऱ्यांनी तसेच राज्याच्या ऊर्जामंत्र्यांनीही विरोध केला आहे. नव्या कायद्यात राज्यांच्या अधिकारांवर गदा येण्यासोबतच वीजग्राहकांच्या अधिकारांवर संकट येण्याची शक्यता असल्याचे त्यांनी म्हटले आहे.

वीज कर्मचारी, वीजग्राहकांनंतर आता खुद्द राज्याचे ऊर्जामंत्री डॉ. नितीन राऊत यांनीही या प्रस्तावित विधेयकाला विरोध केला आहे. हे सुधारणा विधेयक म्हणजे, घटनेचे उल्लंघन आहे, संघराज्य रचनेला सुरुंग लावण्याचा हा केंद्राचा प्रयत्न आहे. सत्तेचे विकेंद्रीकरण करून वीज क्षेत्रात कार्यक्षमता वाढवणे व पारदर्शकता निर्माण करणे आवश्यक आहे, असे मत ऊर्जामंत्र्यांनी व्यक्त केले.

'राज्य सरकारला घटनेने दिलेल्या विजेच्या क्षेत्रातील अधिकारांवर केंद्र शासनाला गदा आणायची आहे. राज्याच्या वीजनिर्मिती, वितरण व पारेषणच्या कारभारात त्यांना हस्तक्षेप करायचा आहे. संविधानाच्या सातव्या सूचित केंद्र व राज्याला विजेला अनुसरून योग्य ते कायदे करण्याचे समान अधिकार प्रदान करण्यात आले आहे. मात्र, प्रस्तावित वीज (सुधारणा) विधेयकात केंद्राला या क्षेत्रातील अधिकारावर कुरघोडी करण्याचा हक्क मिळाल्याने राज्याच्या कारभारात केंद्राचा हस्तक्षेप वाढेल. केंद्राला वीज क्षेत्राचे खाजगीकरण करायचे असून, यासाठी वेगवेगळ्या तंत्राचा, धोरणाचा व नीतीचा वापर करण्यात येत आहे. बड्या उद्योग समूहाला वीज क्षेत्रात एकाधिकार मिळवून देण्यासाठी खाजगीकरणाचा डाव रचल्या जात असून, प्रस्तावित वीज (सुधारणा) विधेयकामुळे केंद्राला ते साध्य करता यावे, असा उद्देश यामागे दिसून येतो,' असा आरोपही डॉ. राऊत यांनी केला.

१९४३ मध्ये वीज धोरण देशाचे पहिले ऊर्जामंत्री भारतरत्न, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांनी तयार केले होते. विजेला संपूर्णतः सार्वजनिक क्षेत्राच्या कक्षेत ठेवून, खाजगी क्षेत्राला यापासून दूर ठेवण्याचे धोरण अवलंबिले आहे. सामान्य जनतेच्या हिताचे रक्षण करण्यासाठी विजेला सार्वजनिक क्षेत्राच्याच ताब्यात ठेवणे गरजेचे असल्याचे मत डॉ. आंबेडकर यांनी २४ ऑक्टोबर १९४३ च्या वीज कमिटीच्या बैठकीत मांडले होते. डॉ. आंबेडकरांची विजेच्या संदर्भातील दूरदृष्टी आजच्या काळातही फार मोलाची व समर्पक असल्याचे डॉ. राऊत म्हणाले. केंद्राला विजेच्या विषयावर राज्यावर कुरघोडी करता येत नाही. पारदर्शकता व कार्यक्षमता वाढविण्यासाठी सत्तेच्या विकेंद्रीकरणाला घटनेने खूप महत्त्व दिले असल्याचे त्यांनी म्हटले आहे.

सद्यस्थितीत राज्यांना व राज्य वीज नियामक आयोगांना वीज अधिनियम २००३ नुसार, योग्य पद्धतीने निर्णय घेण्याचा व वेळोवेळी नियम बनविण्यासाठी देण्यात आलेले अधिकार कायम ठेवण्याची गरज आहे, असे मत डॉ. राऊत यांनी व्यक्त केले असून, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालयाने प्रस्तावित वीज (सुधारणा) विधेयक २०२० मागे घ्यावे, अशी विनंती केंद्रीय ऊर्जामंत्रालयाकडे केली आहे.
चॉकलेट देने के बहाने बच्ची से कपिलनगर नागपुर में  दुष्कर्म :संजय पाटिल

चॉकलेट देने के बहाने बच्ची से कपिलनगर नागपुर में दुष्कर्म :संजय पाटिल

चॉकलेट देने के बहाने बच्ची से दुष्कर्म

संजय पाटिल : नागपुर प्रेस मीडिया : 4 जून 2020 : नागपुर : कपिलनगर चॉकलेट देने के बहाने पड़ोसी ने 10 वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म किया. यह प्रकरण कपिलनगर थाना क्षेत्र में सामने आया. पुलिस ने आरोपी रवि तुमडाम (50) के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
पुलिस के अनुसार रवि 6 महीने पहले ही परिसर में रहने आया था. शुरुआत से ही उसकी गतिविधि संदिग्ध होने के कारण परिसर के नागरिक उससे बातचीत नहीं करते थे. पीड़ित बालिका उसके घर के पास ही रहती है. पिता एमआईडीसी की कम्पनी में काम करते हैं और मां लोगों के घरों में बर्तन धोने का काम करती है. माता-पिता दिन में काम पर चले जाते थे. पीड़ित बच्ची अपने 12 वर्षीय भाई के साथ घर में रहती थी. इस दौरान रवि रोजाना उनके घर पर आकर बच्चों को चॉकलेट और चिप्स देता था.
3 महीने पहले उसने बच्ची को चॉकलेट दिलाने के बहाने अपने घर पर बुलाया. उसके साथ दुष्कर्म किया. किसी को कुछ बताने पर माता-पिता और भाई को मारने की धमकी दी. इसके बाद से बच्ची रवि को देखकर सहम जाती थी. पूछताछ में उसने सारी घटना की जानकारी दी. चाइल्ड लाइन के सदस्यों की मदद ली और कपिलनगर थाने में मामला दर्ज करवाया गया.
नागपूर पाटबंधारे उपविभागाचे लिपिकने हडपली रोख रक्कम: संजय पाटील

नागपूर पाटबंधारे उपविभागाचे लिपिकने हडपली रोख रक्कम: संजय पाटील

262 tenders issued by VIDC under ACB scanner - The Hitavada

संजय पाटील ; नागपूर प्रेस मीडिया  : 4 जून 2020 : बेला :  वडगाव पाटबंधारे उपविभागतील कानिष्ठ लिपिकणे एक लाख त्रिशांसी हजार रुपायांची रुख हडपाली. याप्रकर्णी बेला पॉलिसानी लिपिक पी. S मेश्राम यांच्य विरोधात अफरताफर केल्याचा गुन्हा नोंदणीकृत केला आहे . उपविभागीया अधिकारी अभियन्ते राजेश पाटिल यानी दिलृल्या तकरारीवरुन हा गुण दखल कर्ण्यत आला आहे. मेश्राम  हा फरार असुन, पोलिस त्याच  शोधत आहेत. 

Tuesday, 2 June 2020

पत्रकारों की “वेतन में कटौती और नौकरी समाप्त” अदालत ने केंद्र, राज्य से मांगा जवाब : संजय पाटिल

पत्रकारों की “वेतन में कटौती और नौकरी समाप्त” अदालत ने केंद्र, राज्य से मांगा जवाब : संजय पाटिल

Press Logo Images, Stock Photos & Vectors | Shutterstock


संजय पाटिल : नागपुर प्रेस मीडिया:  3 जून 2020 : नागपुर :  पत्रकारों के दो संघों द्वारा बंबई उच्च न्यायालय में दायर की गई, “वेतन में कटौती और नौकरी समाप्त” करने को चुनौती देने वाली एक याचिका पर यहां मंगलवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र, महाराष्ट्र सरकार और कुछ मीडिया संस्थानों से जवाब देने को कहा है। महाराष्ट्र श्रमजीवी पत्रकार संघ (एमयूडब्ल्यूजे) और नागपुर श्रमजीवी पत्रकार संघ (एनडब्ल्यूयूजे) ने अनुरोध किया है कि छह अग्रणी मराठी अखबारों द्वारा कर्मचारियों को नौकरी से निकालने और उनके वेतन में कटौती करने को अवैध घोषित किया जाए। याचिकाकर्ताओं द्वारा अखबारों को प्रतिवादी बताया गया है। याचिका में कहा गया कि मीडिया के कर्मचारी कोविड-19 के माहौल और लॉकडाउन में भी काम कर रहे हैं और मीडिया संस्थानों द्वारा उनके अनुबंध का नवीकरण करने के बजाय सेवा समाप्त करना अमानवीय और अवैध है। न्यायमूर्ति एस बी शुक्रे और न्यायमूर्ति ए एस किलोर ने कहा कि याचिका पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
 हाईकोर्ट, "पीएम केयर फंड कैसे खर्च किया जाएगा " ? : संजय पाटिल

हाईकोर्ट, "पीएम केयर फंड कैसे खर्च किया जाएगा " ? : संजय पाटिल

Bombay High Court extends gangster Arun Gawli s parole by five ...

संजय पाटिल : नागपुर प्रेस मीडिया : 3 जून 2020 : नागपूर : सुप्रीम कोर्ट ने पीएम केयर फंड की स्थापना पर सवाल उठाने वाली दो याचिकाओं को खारिज करने के बावजूद, बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने ट्रस्ट के अध्यक्ष, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को नोटिस जारी किया, केंद्र सरकार और अन्य से पूछा कि पीएम केयर फंड से पैसे कैसे खर्च होंगे।

नागपुर उच्च न्यायालय में अधिवक्ता अरविंद वाघमारे द्वारा दायर जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति  सुनील शुक्रा और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। उच्च न्यायालय ने पीएम केयर फंड ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में अपनी क्षमता के साथ, प्रधानमंत्री, ट्रस्ट के सचिव, वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, मंडल आयुक्त, जिला कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को भी नोटिस जारी किए हैं। इसने अन्य प्रतिवादियों को भी दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।

अरविंद वाघमारे ने याचिका में पीएम केयर फंड ट्रस्ट की स्थापना पर कोई आपत्ति नहीं जताई और स्पष्ट किया कि वह स्वयं कुछ राशि दान करके अधिनियम के विरोध में नहीं थे। हालांकि, पीएम केयर फंड ट्रस्ट की समग्र संरचना में कहा गया है कि तीन सदस्यों को समाज में प्रतिष्ठित व्यक्ति या देश में प्रतिष्ठित व्यक्ति होने चाहिए। इस ट्रस्ट की स्थापना के बाद, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और अन्य पदाधिकारियों को इसमें नियुक्त किया गया था। याचिका में कहा गया है कि सामाजिक और अन्य क्षेत्रों में तीन रिक्तियां हैं।.

इसके अलावा, पीएम केयर फंड ने देश भर से फंड जुटाए हैं। वास्तव में इस फंड को कैसे खर्च किया जाएगा, राज्यों को इससे कितना फायदा होगा, इस फंड से होने वाले खर्च का लेखा-जोखा CAG द्वारा सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

इस बीच, केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने वाघमारे की याचिका का विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में उल्लिखित सभी बिंदुओं को पहले ही खारिज कर दिया है। एक याचिका को बिना नोटिस के खारिज कर दिया गया, जबकि दूसरे को वापस ले लिया गया। सिंह ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा समान मुद्दों को सुनने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने सिंह के तर्क को खारिज कर दिया। हम यहां सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए मुद्दों की अनदेखी करेंगे। लेकिन, जनता को यह जानने का अधिकार है कि तीन लोगों को अभी तक इस फंड ट्रस्ट में क्यों नियुक्त नहीं किया गया है और पीएम केयर में जमा धन कैसे खर्च किया जाएगा। इसलिए, इन दो मुद्दों पर दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया गया था।

PMO ने पीएम केयर्स फंड को ‘लोक प्राधिकार’ घोषित करने संबंधी याचिका की विचारणीयता पर सवाल उठाये

संजय पाटील :  नागपूर प्रेस मीडिया : 11 जून 2020 : नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने ‘पीएम केयर्स फंड’ को आरटीआई कानून के तहत ‘लोक प्राधिकार’ घोषित करने की मांग करने वाली एक याचिका की विचारणीयता पर बुधवार दिल्ली उच्च न्यायालय में सवाल उठाये। वीडियो कांफ्रेंस के जरिये की गई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नवीन चावला को पीएमओ की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि वह एक जवाब दाखिल करेंगे जिसमें बताया जायेगा कि इस याचिका पर विचार क्यों नहीं किया जाना चाहिए। उच्च न्यायालय ने मामले को सुनवाई के लिए 28 अगस्त तक सूचीबद्ध कर दिया। उच्च न्यायालय सम्यक गंगवाल की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ), पीएमओ के दो जून के एक आदेश को चुनौती दी गई है।
याचिका में कहा गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने उन्हें इस आधार पर दस्तावेज उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया कि पीएम केयर्स फंड सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत एक लोक प्राधिकार नहीं है। याचिका में सीपीआईओ के आदेश को खारिज करने और आरटीआई आवेदन में उनके द्वारा मांगे गये दस्तावेज उपलब्ध कराये जाने के निर्देश देने का अनुरोध किया है। अधिवक्ताओं देबप्रियो मौलिक और आयुष श्रीवास्तव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के निपटने के लिए उठाये गये एक कदम के तहत पीएमओ ने 28 मार्च को एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिये प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति राहत कोष (पीएम केयर्स फंड) का गठन किये जाने की घोषणा की थी। पीएमओ ने प्रेस विज्ञप्ति में कोविड-19 महामारी के गंभीर स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभावों के मद्देनजर नागरिकों से पीएम केयर्स फंड में दान करने की अपील की थी।
याचिका में कहा गया है कि एक मई को याचिकाकर्ता ने एक आरटीआई आवेदन दायर किया था और पीएम केयर्स फंड की ‘ट्रस्ट दस्तावेज’ की एक प्रति, फंड से संबंधित दस्तावेज या पत्र और पूरी फाइल की एक प्रति मांगी थी जिसमें फंड का गठन करने का फैसला लिया गया। इसमें कहा गया है कि हालांकि पीएमओ के सीपीआईओ ने इस आधार पर दो जून को सूचना देने से इनकार कर दिया कि पीएम केयर्स फंड आरटीआई अधिनियम के तहत कोई लोक प्राधिकार नहीं है।
इस निर्णय को याचिका में चुनौती दी गई है। प्रधानमंत्री, रक्षा, गृह और वित्त मंत्री पीएम केयर्स फंड के पदेन ट्रस्टी हैं। इस बीच पीएम केयर्स फंड को लेकर दायर एक अन्य याचिका वापस लिये जाने पर मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने इसे खारिज कर दिया क्योंकि याचिकाकर्ता ने आरटीआई कानून के तहत आवेदन किये बगैर ही अदालत में यह याचिका दायर की थी। वकील सुरेंद्र सिंह हुड्डा ने याचिका दायर कर आरटीआई अधिनियम के तहत पीएम केयर्स फंड के बारे में सूचना दिये जाने का आग्रह किया था क्योंकि यह एक लोक प्राधिकार है। याचिकाकर्ता ने इस फंड में मिले धन का ब्योरा देने के लिए निर्देश जारी करने का आग्रह किया था। 

Monday, 1 June 2020

"फक्त ५ किलो तांदूळ" :संजय पाटील

"फक्त ५ किलो तांदूळ" :संजय पाटील

राज्य सरकारची उच्च न्यायालयाच्या आदेशाला बगल

संजय पाटील : नागपूर प्रेस मीडिया :  2 जून 2020 : नागपूर : टाळेबंदीच्या काळात  स्थलांतरित कामगार तसेच भूमिहीन मजूरांना जगणे कठीण झाले. राज्य सरकारने केवळ शिधापत्रिका असलेल्यांना धान्यवाटप केले. पण, शिधापत्रिका नसलेले आणि स्थलांतरित मजुरांवर उपाशी राहण्याची वेळ आली. याकडे न्यायालयाचे लक्ष वेधण्यााठी अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत या सामाजिक संस्थेने मुंबई उच्च न्यायालयाच्या नागपूर खंडपीठात याचिका दाखल केली. त्यावरील सुनावणी पश्चात उच्च न्यायालयाने राज्य सरकारला तातडीने शिधापत्रिका नसलेले आणि गरजू लोकांना शोधून काढण्यासाठी सव्‍‌र्हे करण्याचा १२ मे २०२० रोजी अंतरिम आदेश दिला. तसेच त्यांना १० किलो गहू, १० किलो तांदूळ, १ किलो तूर डाळ, १ किलो चना डाळ, १ किलो साखर, २५० ग्रॅम चहा पत्ती आणि १ किलो गोडे तेल मोफत देण्याचे स्पष्ट आदेश दिले आहे. राज्य सरकारने मात्र या आदेशाकडे दुर्लक्ष केले. राज्य शासनाने १९ मे २०२० रोजी निर्णय घेत शिधापत्रिका नसलेल्या आणि गरजवंतांना मे आणि जून महिन्यात प्रतिव्यक्ती केवळ ५ किलो तांदूळ वितरित करण्याचा निर्णय घेतला.
 टाळेबंदीमुळे गरीब वर्गाची उपासमार होत असल्याने त्यांना अन्नधान्याची किट (१० किलो गहू, १० तांदूळ, १ किलो तूर डाळ, १ किलो तेल) वाटप करण्याच्या आदेशाला बगल देत राज्य सरकारने केवळ ५ किलो तांदूळ दोन महिन्यांसाठी वितरित करण्याचा आदेश काढला आहे.
करोना प्रादुर्भावाच्या पार्श्वभूमीवर केंद्राच्या पंतप्रधान गरीब कल्याण योजनेअंर्तगत राष्ट्रीय अन्नसुरक्षा योजनेत शिधापत्रिका नसलेल्यांना अन्नधान्याचा लाभ देण्यात आला नाही. त्यांना आत्मनिर्भर भारत वित्तीय सहाय पॅकेजअंतर्गत विस्थापित मजुरांना मे व जून २०२० या दोन महिन्यांकरिता प्रतिव्यक्ती प्रतिमाह पाच किलो तांदूळ मोफत देण्यात येत आहे, असे राज्य सरकारने आपल्या आदेशात म्हटले आहे.
छगन भुजबळ, अन्न व नागरी पुरवठा मंत्री : "राष्ट्रीय अन्नसुरक्षा कायद्याखाली केंद्र सरकारकडून मिळालेले धान्य राज्य सरकार नागरिकांना पुरवठा करीत असते. काही कार्यक्रम राज्य सरकार स्वत: राबवत असते. जसे केसरी कार्डधारकांना आम्ही खरेदी करून धान्य वाटप केले. साखर अंत्योदय कार्डधारकांना देतो. तेल आणि साखरेचा पुरवठा याकडे लक्ष देतो. नागपुरात राबवण्यात आलेला कार्यक्रम राज्य आपत्ती व्यवस्थापन निधी (एसडीआरएफ) आधारित कार्यक्रम आहे. त्याच अनुषंगाने उच्च न्यायालयाचा आदेश आहे."